सेना के साथियों व कलाम साहब को नमन् ..एक भोजपुरी गीत ....!!
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पकिस्तान देसवा के मिटा द वीरना,
धोखेबाजन से नाता छुड़ा द वीरना !
कबो कहे हम हयी, भाई - भाई ,
अब न करब भइया कबहूं लड़ाई,
पैसठ क डण्डा, बहत्तर के पिटाई !
सेना घुसल लाहौर में याद आई माई,
पीठ फेर बदल गयील, ठनका द वीरना !
सब्र टूटेला हमरो, जता द वीरना !!
धोखेबाजन से नाता .....!!
देस में सकून बा, एका बा धरम में,
सर्व-धर्म समभाव, छवि बा जगत में,
राम रहीम क , देस मोर भाई ,
गांधी, भगत के, के बा भुलाईल !
देस तोड़वन के हिंदी सिखा द वीरना !!
खून जाया न जायी बता द वीरना !!
धोखेबाजन से नाता ....!!
अातंकी खेल खेला, खूब खेला भाई ,
पहिले तोहार घर जरिके ओराई ,
ऎटमी बम तोहार वहीं दग जायी,
बच तू नाहीं पइबा ,इहंवा कलाम भाई !
" सन्त " कहें फूंक दा उड़ा द वीरना !
वोकर हस्ती क मिट्टी मिला द वीरना !!
पकिस्तान देसवा के मिटा द वीरना,
धोखेबाजन से नाता छुड़ा द वीरना !!
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🇮🇳
जय हिंद ..जय भारत
कारगिल युद्ध के समय मेरे द्धारा रचित टूटी फूटी कविता ॥
विजय सिंह " सन्त " 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
शनिवार, 12 सितंबर 2015
देश भक्ति गीत
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