धूप छांव से साथ ना छूटी ,
कर चला हमसे करार हो ...,
हमरे गाँवे अइहा रानी
नाम बा बागापार हो .
गाँव. क डेहरी गाँव. क खोन्हा ,
चाउर गमके सोन्हा - सोन्हा,
दूध दही अ घीव बा असली,
खुशबू फइलै कोना - कोना,
चइला पर क रोटी खिअाइब ,
अमिया अउर अचार हो ,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ॥१॥
धन दौलत ना इहवां पइबू,
ना पइबू करधनियां हो,
प्यार क अचरा प्यार क असरा,
पइबू तू गलबहिंयां हो,
अखियां में हम तोहें बसाइब ,
मनवां चाही यार हो,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ।। २॥
सइकिलिया प बिठा के गोरी,
जंगल तोहें घुमाइब हो ,
भोले बाबा, सम्मे माई,
माथा तूरा टेकाइब हो ,
बोकड़ा माई,लेहड़ा माई,
लागल भीड़ अपार हो,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ॥३॥
प्रेम रही बस अाठो जुनियां,
जब कहबू तब पीयब पनियां,
नरम कलइया बल ना खाए ,
सुना - सुना तू मोर परनियां,
"संत " सुनइहैं अापन गाना,
जियरा में उगी बहार हो ,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ॥४॥
धूप छांव से साथ न छूटी,
कर चला हमसे करार हो,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ॥ " सन्त " ॥
शनिवार, 12 सितंबर 2015
बागापार हो...!
हिंदुस्तान
दुनिया का अजूबा देश हिंदुस्तान है ,यहाँ हिन्दू मुस्लिम साथ रहते है !
यह देश राम रहीम का है ,बुद्ध- कबीर नानक का यह देश है !
यहाँ सैकड़ो - करोडो घूस खाने वाले मुल्ला, बाबा, नेता है !
यहाँ सचिन सैकड़ो का सैकड़ा लगाते है !
यहाँ अस्सी करोड़ जनता मेहनत कर खाती है !
सोनिया विश्व की चौथी अमीर महिला बन यहाँ का नाम रौशन करती है !
मेरा भारत महान है , यही हमारी पहचान है !!
विजय सिंह "सन्त "
देवदास ( कविता)
जलालत के द्वार पर, मारा हुआ आदमी ,
होश हवास न बाकी, मधु का मारा हुआ आदमी ।
शोहबते हुस्न में खोया हुआ था ,
पाक मुहब्बत पिरोया हुआ था ।
गर्दिश-ए-वक्त ने ढाया सितम,
ठोकर-ए-इश्क ने दिया लाखो ग़म,
ग़म हो कुछ कम,
हाला का मारा हुआ आदमी ॥
पारो के बाद चन्द्रमुखी है आयी ,
मदिरा संग - संग शनासायी ।
इति हुअा कुछ वर्षों का दौर,
चुभने लगी, चन्द्रमुखी की प्यारी सी ठौर ।
भाग सका न भाग ही पाया,
जीवन से भागा हुआ आदमी ।।
ज़हन के किसी कोने में, पारो है बाकी,
जाना तो पड़ेगा, अब जाने दे साक़ी ।
राह गुजरा, संगी साथी गुजारे,
पहुँच ही गया, इश्क देवी के द्वारे ।
मुक्त हुआ बेबस बावला,
निष्प्राण पड़ा, हारा हुआ आदमी ।
जलालत के द्वार पर, मारा हुआ आदमी ॥
विजय सिंह " सन्त "
हास्य कविता
मैं समझा भरा है प्याला,
पर ये तो खाली है !
थोड़े में ज्यादा क्या बतलाऊँ,
जैसे मेरी घर वाली है !!
पी के आया रात,
किल्ली खट - खट ,खट- खट खटकाया ,
दरवाजा जब खुला नहीं तो,
शेरों जैसा गुर्राया,
खुला फटाका ,गिरा सटाका,
मचा रही है शोर ,पकड़ लो चोर
गज़ब की साली है !
मैं समझा भरा है प्याला, पर ये तो खाली है !!
मदिरालय में शोर हो रहा,
किसने पी ली मेरी शराब ,
किसने खाया चिखना मेरा ,
किसने ले ली मेरी हिसाब. !
मदिरालय के फुटपाथ पर पड़ा रहा सारी रात,
न कोई साथ, बगल में नाली है !
मैं समझा भरा है प्याला, पर ये तो खाली है !!
भेद न रहता इसको पीने से,
सब संगी साथी बन जाते,
हंसते गाते, ढोल बजाते,
मधुशाला के मधु चट जाते !
साक़ी बाला ने दिया जो हाला,
" सन्त " चढाया कन्ठ,
बजाइ ताली है !
मैं समझा भरा है प्याला, पर ये तो खाली है !!
थोड़े में ज्यादा क्या बतलाऊं,
जैसे मेरी घर वाली है !!
😀😀😀😀😜😜😜
विजय सिंह " सन्त "
देश भक्ति गीत
सेना के साथियों व कलाम साहब को नमन् ..एक भोजपुरी गीत ....!!
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पकिस्तान देसवा के मिटा द वीरना,
धोखेबाजन से नाता छुड़ा द वीरना !
कबो कहे हम हयी, भाई - भाई ,
अब न करब भइया कबहूं लड़ाई,
पैसठ क डण्डा, बहत्तर के पिटाई !
सेना घुसल लाहौर में याद आई माई,
पीठ फेर बदल गयील, ठनका द वीरना !
सब्र टूटेला हमरो, जता द वीरना !!
धोखेबाजन से नाता .....!!
देस में सकून बा, एका बा धरम में,
सर्व-धर्म समभाव, छवि बा जगत में,
राम रहीम क , देस मोर भाई ,
गांधी, भगत के, के बा भुलाईल !
देस तोड़वन के हिंदी सिखा द वीरना !!
खून जाया न जायी बता द वीरना !!
धोखेबाजन से नाता ....!!
अातंकी खेल खेला, खूब खेला भाई ,
पहिले तोहार घर जरिके ओराई ,
ऎटमी बम तोहार वहीं दग जायी,
बच तू नाहीं पइबा ,इहंवा कलाम भाई !
" सन्त " कहें फूंक दा उड़ा द वीरना !
वोकर हस्ती क मिट्टी मिला द वीरना !!
पकिस्तान देसवा के मिटा द वीरना,
धोखेबाजन से नाता छुड़ा द वीरना !!
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🇮🇳
जय हिंद ..जय भारत
कारगिल युद्ध के समय मेरे द्धारा रचित टूटी फूटी कविता ॥
विजय सिंह " सन्त " 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
कुछ शेर...!
😁 पोशीदा मुहब्बत दरक गयी,
हवस के दरमयान ;
मैं शीशा बन के रह गया,
पत्थर के दरमयान ;
शनासायी बहुत हुयी,
रिंदों की दुनियां में
जो अफ़जल था वो फ़रक गया,
बावफा के दरमयान ॥
विजय सिंह " सन्त "
मैं तो सीधा अौर बेबाक लिखता हूँ,
कभी तरन्नुम तो कभी अल्फ़ाज लिखता हूँ ;
लोग शायरी या नज़्म लिखते होगें ,
मैं तो दिल से जज़्बात लिखता हूँ ।
विजय सिंह " सन्त "
घबरायें वे जिन्हें महफिल में अकेले होने का एहसास होता है,
चिंता वे करें जो खब़रनवीसों का मोहताज होता है ;
ऎ दिल तू तो साथ है अौर साथ देना मेरा,
हम तो वे परिंदे है जिनके सर खुदा का हाथ होता है ॥
विजय सिंह " सन्त "
मुझे भी अंदाजा है पानी के बहाव का,
कितना गुजर गया ,
कितना गुजरने वाला है ;
समुन्दर की गहराई को भी समझे मेरे दोस्त ..!
सब तो वहीं जाने वाला है ॥
विजय सिंह " सन्त"
तमन्ना है दूर तलक जाने कि,
कोई साथ दे, या न दे ,
मेरी ख़्वाहिश है दिल लगाने की,
कोई साथ दे, या न दे ;
ऎ तंग दिल क्यूं है चिलमन से देखता,
नजदीक आ देख तो ले,
फिर साथ दे, या न दे ॥
विजय सिंह " सन्त "
अब कौन जलाता चराग़ अपने शहर में,
अब कौन दिखाता राह, सूने रहगुजर में,
अन्धेरों को आस थी , रौशन होंगी बस्तियां ,
बादशाह है अन्धे , अब अपने वतन में ॥
विजय सिंह " सन्त "
मुहब्बत है, तो बहानें क्यूं हैं,
दिल हमारे फिर तुम्हारे क्यूं हैं,
सिमट जाओ, आओ आगोश में,
आकाश में चाँद - तारे ज्यूं हैं ॥ " सन्त "
मुर्गा बोलता है
मुर्गे ने किया है कमाल,
इसका शोरब़ा है बेमिसाल,
के मुर्गा बोलता है....!!
के पैसा बोलता है ...!!
मैं चोर हूँ दुनिया चोर ..,
मुझपर सभी का चलता जोर,
के मुर्गा बोलता है...!!
के पैसा बोलता है...!!
मेरे टांगों पर सब मरते है,
लालच पा कर सब करते हैं;
व्हिस्की का मज़ा भी हमसे है,
अय्याशी भी मुझ संग से है ;
नेता है यहां भगवान ,
वोटर बन जाता शैतान ।
के मुर्गा बोलता है ...!!
के पैसा बोलता है...!!
सारी दुनियाँ को भाता हूँ ,
शादी में रास रचाता हूँ ;
गर मैं न होऊं फंक्शन में,
आता न मज़ा इस जीवन में ;
बिगड़ा काम बनें इन्सान ,
मेरे पैरों तले धनवान ।
के मुर्गा बोलता है ...!!
के पैसा बोलता है...!!
मेरा लालच साहब को दो,
चुटकी में काम बनाअो सो;
ईमान को सूली चढवाई,
फाँसी की सज़ा से बचवाई ;
उल्टा काम करें बेईमान,
बोलो जय हो जय शैतान ।
के मुर्गा बोलता है ...!!
के पैसा बोलता है...!!
मुर्गे ने किया है कमाल,
इसका शोरब़ा है बेमिसाल,
के मुर्गा बोलता है....!!
के पैसा बोलता है ...!!
मैं चोर हूँ दुनिया चोर ..,
मुझपर सभी का चलता जोर,
के मुर्गा बोलता है...!!
के पैसा बोलता है...!!
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😜 विजय सिंह " सन्त "😃😃