शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

शिक्षा

भाईयों /बहनों,
   महत्वपूर्ण ये नहीं है कि बच्चे को हम कितनी सहूलियत देते है कि वो अच्छी तरह अध्ययन करे वरन् महत्वपूर्ण ये है कि बच्चा कितना लगनशील है अध्ययन करने हेतु ।
तस्वीर सच्ची कहानी बयां कर रही है ,
अौर इतिहास ऎसे महापुरुषों से भरा पड़ा है जो कठिनाइयों में पढ़े अौर आगे बढ़े व आज महान पुरुषों में उनका नाम इतिहास में अंकित है ।
           
       धनयवाद....!

गुरुवार, 9 जुलाई 2015

कमलाक्ष तेरे...!!

कमलाक्ष तेरे, ,लगाया हूं डेरे,
मधुप्राशन करा दे, घनेरे - घनेरे ।
ओष्ट, कपोल, वक्ष : माधुर्य,
धनुहीं जस तन, फरिया माधुर्य,
यौवत में हो तू, चातुर्य,
मधुसख निहारे, काया मिला दे,
अन्धेरे -अन्धेरे ।
कमलाक्ष तेरे ......॥
स्निग्ध हिया मोरा, परस तो सुन्दरी,
मंजिमा में खोया ,मेरी मंजरी, ,
चित में रहोगी, चिरस्मरणीय,
प्रारब्ध हो मेरी, मुमुक्षा हो मेरे ।
कमलाक्ष तेरे ......॥
तनिष्क सा बदन, तनिष्ट हुआ,
" संत " चला नभ पार,
प्रतिवेदन प्रभु से जो हो,
कहता जा इस बार,
बिसरत रैना, निहारे नैना,
सवेरे-सवेरे ।
कमलाक्ष तेरे लगाया हूं डेरे,
मधुप्राशन करा दे घनेरे -घनेरे ॥
                                           विजय सिंह "सन्त "

क्या हाल हुआ ...!

क्या हाल हुआ आर्यावर्त का ,
कहाँ गए मानवता वाले !
कहां गयी करुणा संग ममता भी ,
सिमट गया आकाश ,
सिमट गई धरती ,
राम - कृष्ण की ये धरती ,
पल पल रहती है  मरती ,
कभी लूट गए आतातायी,
कभी लूट गए गोरिल्ले ,
लूटा खुचा जो बचा हुआ है ,
लूट रहे बन रघुराई ,
तुम भी लूटो हम भी लूटें ,
आखिर है मौसेरे भाई  !!
                                               विजय सिंह "संत"

प्रेम की मधुरता

जहां प्रेम की मधुरता हो,
वहां सब कुछ गवांना ,
जहां स्वार्थ की अधिकता हो
वहां, हरगिज न जाना  ॥
कागजी फूलों का दौर चल रहा है ,
आम आदमी ,
आम आदमी को ठग रहा है,
जहां फूलों में खुशबू हो ,
वहीं घर बसाना,
जहां आपस में कटुता हो,
वहां हरगिज न जाना  ॥
                                     विजय सिंह " सन्त "

विचारणीय

                             समाधान
                             *******
  
  जिन्दगी के हर मोड़ पर, हर दौर में समस्याओं से इंसान घिरा रहता है,  उसे, उस समस्या का समाधान
चाहिए होता है ।
आपको पता है कि कितनों का समस्या अनसुलझा रह जाता है ।
७०-७५ प्रतिशत व्यक्तियों की समस्याएँ अनसुलझी रह जाती है उसका मुख्य कारण है अज्ञानता ..!
जी हां अज्ञानता बस इन्सान अपने समस्या का समाधान नहीं ढ़ूढ़ पाता , उसे सही मार्गदर्शक नहीं मिल पाते, उसे मिल जाते है राय चंद, वही राय चंद जो हर जगह आसानी से उपल्बध रहते है आपको राय देने के लिए, अपने तो जिन्दगी में कुछ किया नहीं दूसरे को मुफ्त में राय देते है अौर एहसान भी जताते है, ऊपर से हमें अपनी समस्याओं में अौर उलझा देते हैं ।
   हमें अपनी समस्याओं के अनुसार विशेषज्ञ सलाहकारों की आवश्यकता होती है, जो उस क्षेत्र में निपुण हो, जिनसे उचित सलाह प्राप्त कर हम अपनी समस्या का निदान कर सके, इसके लिए सर्वप्रथम हमें
अपनी एकाकीपन से बाहर निकलना होगा अौर अपने किसी खास मित्र ( खास मित्र का मतलब जो आपके समस्या को अपना समझे न कि पीठ पीछे चटखारे ले कर आपका उपहास करे)  के समक्ष अपनी समस्या रखना होगा , अब चाहे जैसी भी समस्या हो सुलझ जायेगी जानते है क्यूं, क्योंकि अब हम दो नहीं एक अौर एक मिल कर ग्यारह हो गये , समस्या का समाधान हो कर रहेगा ॥
  बस हमें दो काम करना है पहला मित्र के तलाश में राय चंद न मिल जाएं,  दूसरा मित्र जो वास्तव में मित्र ही हो !
         जय महा काल.!!
      
                                            विजय सिंह " संत "

बुधवार, 8 जुलाई 2015

शुभारंभ

                           शुभ स्वागतम्

         मित्रों मै अाज से आप लोगों के लिए ब्लाग शुरु कर रहा हूं । इस ब्लाग में सामायिक विषयों पर चर्चा होगी व आप सभी का अार्शिवाद क्रिया - प्रक्रिया के रुप में मिलेगा!
     अौर हां मेरे द्वारा रचित कुछ कविताओं का रस पान आप कर सकेगॆं ।
आशा है आपका स्नेह अवश्य प्राप्त होगा ।
                               
                 जय हिंद.!  
                                                  आपका 
          
                                          विजय सिंह " संत "
                                           ०९- ०७ - २०१५