शनिवार, 12 सितंबर 2015

बागापार हो...!

धूप छांव से साथ ना छूटी ,
कर चला हमसे करार हो ...,
हमरे गाँवे अइहा रानी
नाम बा बागापार हो .
गाँव. क डेहरी गाँव. क खोन्हा ,
चाउर गमके सोन्हा - सोन्हा,
दूध दही अ घीव बा असली,
खुशबू फइलै कोना - कोना,
चइला पर क रोटी खिअाइब ,
अमिया अउर अचार हो ,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ॥१॥
धन दौलत ना इहवां पइबू,
ना पइबू करधनियां हो,
प्यार क अचरा प्यार क असरा,
पइबू तू गलबहिंयां हो,
अखियां में हम तोहें बसाइब ,
मनवां चाही यार हो,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ।। २॥
सइकिलिया प बिठा के गोरी,
जंगल तोहें घुमाइब हो ,
भोले बाबा, सम्मे माई,
माथा तूरा टेकाइब हो ,
बोकड़ा माई,लेहड़ा माई,
लागल भीड़ अपार हो,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ॥३॥
प्रेम रही बस अाठो जुनियां,
जब कहबू तब पीयब पनियां,
नरम कलइया बल ना खाए ,
सुना - सुना तू मोर परनियां,
"संत " सुनइहैं अापन गाना,
जियरा में उगी बहार हो ,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ॥४॥
धूप छांव से साथ न छूटी,
कर चला हमसे करार हो,
हमरे गाँवे अइहा रानी,
नाम बा बागापार हो ॥ " सन्त " ॥

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें