गुरुवार, 22 जून 2017

जेलेटिन

जेलेटिन से बना हुआ कैप्सूल ( जिसके अंदर दवा भरी जाती है )

दोस्तों जैसा कि आप जानते है कि १८५७ में महान क्रांतिकारी मंगल पाण्डेय ने विरोध क्यूं किया था ..!
साथियों समय तो बदल गया परन्तु ये वामपंथीयों व अग्रेंजो द्वारा कुरचित प्रथा के शिकार हम आज भी हैं , हमारे हिंदू भाई व मुस्लिम भाई आज भी कारतूस के बदले सूअर व गाय के खुर ( पैर का निचली भाग ) से बने हुये जेलेटिन कैप्सूल के खोल का इस्तेमाल कर रहे हैं ।
परन्तु इसका ज्ञान हमें नहीं है ...
पर हां सरकार अब शाकाहारी कैप्सूल का खोल जो पेड़ के जड़ से बनेगी, उसका व्यवस्था कर रही है या रिसर्च कर रही है कि हम धर्म भ्रष्ट ना हो ।
तो प्रश्न ये है कि हम अब तक कहां हैं व क्या खा रहे हैं  ?
हम किस मुगालते में हैं ...!
वक्त आ गया है कि हम मिल कर पुन: मंगल पाण्डे कि तरह लड़े व एक दूसरे के धर्म की रक्षा करें ।
जय हिंद ....!      जय भारत ...!!

    आपका ही
विजय सिंह " संत "