राम के भक्त कहाँ, बन्दा-ए- रहमान कहाँ,
तू भी हिंदू है कहाँ, मैं भी मुसलमान हूँ कहाँ ।।
तेरे हाथों में भी त्रिशूल है गीता की जगह,
मेरे हाथों में भी तलवार है कुरआन की जगह।।
तू मुझे दोष दे मैं तुझ पे लगाऊँ इल्जाम,
ऐसे आलम में भला अम्न का इम्कान कहाँ ।।
विजय सिंह " संत "