गुरुवार, 22 अगस्त 2019

राजनितिक व सामजिक ......!

दुःखद है:- कि बदले की भावना विश्व में विश्व निर्माण से चला आ रहा है और हम तब भी व अब भी इस कृत के लिए दोषी हैं ।
एक कहावत है
' आज हमारी कल तुम्हारी, देखो लोगों बारी-बारी '
इन्दिरा ने जेपी आन्दोलन के सभी कर्णधारों को राजनीति से प्रेरित होकर अंदर किया ...,
देसाई ने मौका मिलने पर इन्दिरा को हिरासत में लिया ।
आज के दौर में अपराधिक मामले में अमित शाह अंदर गये व बा इज्जत बाहर आए ,
अब चिदम्बरम घोटाले में अन्दर गये ..!
वाह क्या बात है ....!!
कानून कोर्ट तब भी था ..
अब भी है ...!
किसी भाजपाई या कांग्रेसी को परेशान होने की जरुरत लेस. मात्र का नहीं होना चाहिए, क्योंकि कानून तब भी अपना काम कर रहा था और अब भी करेगा ...!
लेकिन दुःखद ...ये बदले की कार्यवाही बंद होनी चाहिए, लेकिन होगा नहीं ..
हमारे रगो में बदला लेने की भावना तो सदियों से है ..तो समाज ..देश व दुनिया. से क्यूं न लिया जाए ।✍✍