शनिवार, 7 अक्टूबर 2023

चाँद

रात सुहानी है.!
चाँद नूरानी है..!
सिमटी हुयी घड़िया हैं.. ;
जुल्फ़ो की जो लड़ियां है...;
अधरों पे निशानी है ।
रात सुहानी है...!
बिंदिया कुछ बोले है,
कंगना भी तो बोले है,
कुछ आज दीवानी है.. ,
कुछ खास कहानी है ।
रात सुहानी है...!
चाँद नूरानी है....!

      *विजय सिंह " सन्त "*