क्या हाल हुआ आर्यावर्त का ,
कहाँ गए मानवता वाले !
कहां गयी करुणा संग ममता भी ,
सिमट गया आकाश ,
सिमट गई धरती ,
राम - कृष्ण की ये धरती ,
पल पल रहती है मरती ,
कभी लूट गए आतातायी,
कभी लूट गए गोरिल्ले ,
लूटा खुचा जो बचा हुआ है ,
लूट रहे बन रघुराई ,
तुम भी लूटो हम भी लूटें ,
आखिर है मौसेरे भाई !!
विजय सिंह "संत"
ak aacha prayas
जवाब देंहटाएंस्वागत है,एसी ही उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है ।
जवाब देंहटाएंWelcom baghel jiiii
जवाब देंहटाएं& nice poets