कमलाक्ष तेरे, ,लगाया हूं डेरे,
मधुप्राशन करा दे, घनेरे - घनेरे ।
ओष्ट, कपोल, वक्ष : माधुर्य,
धनुहीं जस तन, फरिया माधुर्य,
यौवत में हो तू, चातुर्य,
मधुसख निहारे, काया मिला दे,
अन्धेरे -अन्धेरे ।
कमलाक्ष तेरे ......॥
स्निग्ध हिया मोरा, परस तो सुन्दरी,
मंजिमा में खोया ,मेरी मंजरी, ,
चित में रहोगी, चिरस्मरणीय,
प्रारब्ध हो मेरी, मुमुक्षा हो मेरे ।
कमलाक्ष तेरे ......॥
तनिष्क सा बदन, तनिष्ट हुआ,
" संत " चला नभ पार,
प्रतिवेदन प्रभु से जो हो,
कहता जा इस बार,
बिसरत रैना, निहारे नैना,
सवेरे-सवेरे ।
कमलाक्ष तेरे लगाया हूं डेरे,
मधुप्राशन करा दे घनेरे -घनेरे ॥
विजय सिंह "सन्त "
गुरुवार, 9 जुलाई 2015
कमलाक्ष तेरे...!!
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Good
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